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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 26 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 26 • मन्त्र 6

20.26.6

Mantra ID: 20.26.6

के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ । समु॒षद्भि॑रजायथाः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.26.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मनुष्यो! अंधकार में छिपे पदार्थो को अपने प्रकाश से आकार देने वाले तथा अज्ञानी को ज्ञान प्रदान करने वाले सूर्य अपनी किरणों के साथ उदय हो गए हैं. तुम इन के दर्शन करो. (६)

EN English Translation

O men! The sun, which shapes the substances hidden in darkness with its light and gives knowledge to the ignorant, has risen with its rays. You see these. (6)

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