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20.34.8
यं क्रन्द॑सी संय॒ती वि॒ह्वये॑ते॒ परेऽव॑र उ॒भया॑ अ॒मित्राः॑ । स॑मा॒नं चि॒द्रथ॑मातस्थि॒वांसा॒ नाना॑ हवेते॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑ ॥ (८)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.34.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
आकाश और पृथ्वी दोनों एकमत हो कर इंद्र का आह्वान करते हैं. द्युलोक हवि के लिए तथा पृथ्वी वर्षा के लिए इंद्र को बुलाते हैं. समान रथ में बैठे हुए सेनापति जिन्हें बुलाते हैं, वे ही इंद्र हैं. (८)
EN English Translation
Both the sky and the earth unanimously invoke Indra. Dulok calls Indra for Havi and Earth for rain. The commanders sitting in the same chariot call him are Indra. (8)