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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 34 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 34 • मन्त्र 9

20.34.9

Mantra ID: 20.34.9

यस्मा॒न्न ऋ॒ते वि॒जय॑न्ते॒ जना॑सो॒ यं युध्य॑माना॒ अव॑से॒ हव॑न्ते । यो विश्व॑स्य प्रति॒मानं॑ ब॒भूव॒ यो अ॑च्युत॒च्युत्स ज॑नास॒ इन्द्रः॑ ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.34.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र की सहायता के बिना विजय की कामना करने वाले लोग अपने शत्रुओं को पराजित नहीं कर सकते. इसी कारण वे युद्ध के अवसर पर इंद्र को बुलाते हैं. जो अचल पर्वतों को हटाने में समर्थ हैं तथा जो प्राणियों का पुण्य देखते हैं, वे इंद्र हैं. (९)

EN English Translation

Without Indra's help, people who wish for victory cannot defeat their enemies. That is why they call Indra on the occasion of war. Those who are able to remove immovable mountains and who see the virtue of beings are Indra. (9)

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