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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 63 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 63 • मन्त्र 2

20.63.2

Mantra ID: 20.63.2

आ॑दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म् । ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रा॒न्यदाय॑न्दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.63.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन देवताओं ने स्वर्ग की रक्षा के लिए राक्षसों का विनाश किया था, वे इंद्र आदित्य और मरुत्‌ हमारे शरीर की रक्षा के लिए हमारे यज्ञ में पधारें. (२)

EN English Translation

The gods who destroyed the demons to protect heaven, Indra Aditya and Marut came to our yajna to protect our body. (2)

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