Popular:
अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 63 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 63 • मन्त्र 3

20.63.3

Mantra ID: 20.63.3

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नयं॒ छची॑भि॒रादित्स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन् । अ॒या वाजं॑ दे॒वहि॑तं सनेम॒ मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑ ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 20.63.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिन इंद्र ने अपनी शक्ति से सूर्य को प्रत्यक्ष किया तथा पृथ्वी को अन्न वाली बनाया, उन्हीं इंद्र से हम देवताओं का हितकारी अन्न प्राप्त करें तथा वीरों से युक्त रहते हुए सौ वर्षो की आयु प्राप्त करें. (३)

EN English Translation

Indra, who made the sun manifest with his power and made the earth food, from the same Indra, we should get the beneficial food of the gods and get the age of a hundred years while being full of heroes. (3)

卐 HinduText AI