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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 68 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 68 • मन्त्र 8

20.68.8

Mantra ID: 20.68.8

अ॒स्य पी॒त्वा श॑तक्रतो घ॒नो वृ॒त्राणा॑मभवः । प्रावो॒ वाजे॑षु वा॒जिन॑म् ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.68.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम सोमरस पी कर वृत्र असुर के लिए मृत्यु रूप बनो तथा युद्ध क्षेत्र में हमारे ऐश्वर्य की रक्षा करो. (८)

EN English Translation

O Indra! Drink someras and become a form of death for Vritra Asura and protect our wealth in the battlefield. (8)

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