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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 78 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 78 • मन्त्र 2

20.78.2

Mantra ID: 20.78.2

न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः । यत्सी॒मुप॒ श्रव॒द्गिरः॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.78.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये इंद्र यदि हमारी स्तुतियों को सुन लेते हैं तो गौ से युक्त अन्न देने में विलंब नहीं करते. (२)

EN English Translation

If these Indras listen to our praises, then they do not delay in giving food containing cow. (2)

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