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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 12

20.92.12

Mantra ID: 20.92.12

अ॑र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म् । स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म् ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र श्रेष्ठ राजकुमार के समान अपने रथ पर बैठते हैं. वे अपने पिता द्यावा और माता पृथ्वी के निमित्त खाने के लिए भोजन पकाते हैं. (१२)

EN English Translation

Indra sits on his chariot like a superior prince. They cook food for their father Dyawa and mother Prithvi. (12)

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