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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 92 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 92 • मन्त्र 13

20.92.13

Mantra ID: 20.92.13

आ तू सु॑शिप्र दम्पते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म् । अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म् ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.92.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम स्वर्ण से बने इस रथ पर बैठो. तुम्हारी कृपा से हम भी उस स्वर्ग पर चढें, जो सुंदर वाणियों से संपन्न एवं हजारों मार्गो वाला है. (१३)

EN English Translation

O Indra! You sit on this chariot made of gold. By your grace, let us also climb that heaven, which is full of beautiful words and has thousands of paths. (13)

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