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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 11 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 11 • मन्त्र 11

4.11.11

Mantra ID: 4.11.11

द्वाद॑श॒ वा ए॒ता रात्री॒र्व्रत्या॑ आहुः प्र॒जाप॑तेः । तत्रोप॒ ब्रह्म॒ यो वेद॒ तद्वा अ॑न॒डुहो॑ व्र॒तम् ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.11.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस वृषभ में व्याप्त यज्ञात्मक प्रजापति के व्रत के योग्य बारह रात्रियों को विद्यमान बताते हैं. उन रात्रियों में प्रजापति रूपी वृषभ को जो जानता है, वही इस व्रत का अधिकारी है. (११)

EN English Translation

Twelve nights worthy of the fast of Yajnatmik Prajapati prevailing in this Taurus are said to be present. In those nights, the one who knows Prajapati-like Taurus is the possessor of this fast. (11)

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