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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 11 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 11 • मन्त्र 12

4.11.12

Mantra ID: 4.11.12

दु॒हे सा॒यं दु॒हे प्रा॒तर्दु॒हे म॒ध्यंदि॑नं॒ परि॑ । दोहा॒ ये अ॑स्य सं॒यन्ति॒ तान्वि॒द्मानु॑पदस्वतः ॥ (१२)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.11.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ऊपर बताए गए लक्षणों वाले वृषभ को मैं सायंकाल, प्रातःकाल और दोपहर के समय दुहता हूं. मैं सभी यज्ञों के अनुष्ठान के फलों को भी दुहता हूं. इस वृषभ के जो दोहन फल प्रदान करते हैं, उन्हें मैं जानता हूं. (१२)

EN English Translation

I milk Taurus with the above mentioned symptoms in the evening, morning and afternoon. I also milk the fruits of the rituals of all the yagnas. I know the harness fruits of this Taurus that provide. (12)

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