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अथर्ववेद

Kanda 4 • Sukta 11 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 4 • सूक्त 11 • मन्त्र 2

4.11.2

Mantra ID: 4.11.2

अ॑न॒ड्वानिन्द्रः॒ स प॒शुभ्यो॒ वि च॑ष्टे त्र॒यां छ॒क्रो वि मि॑मीते॒ अध्व॑नः । भू॒तं भ॑वि॒ष्यद्भुव॑ना॒ दुहा॑नः॒ सर्वा॑ दे॒वानां॑ चरति व्र॒तानि॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 4.11.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह बैल इंद्र है. इसलिए सभी पशुओं की अपेक्षा अधिक तेजस्वी है. जिस प्रकार बैल अविच्छिन्न रूप से संतान उत्पन्न करता है, इंद्र उसी प्रकार भूत, भविष्य और वर्तमान वस्तुओं को उत्पन्न करता हुआ अन्य देवों के कार्य करता है. (२)

EN English Translation

This bull is Indra. Therefore, it is more stunning than all animals. Just as the bull produces children inseparably, Indra does the work of other gods, producing past, future and present things. (2)

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