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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 13 • Mantra 20

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 13 • मन्त्र 20

9.13.20

Mantra ID: 9.13.20

वि॑स॒ल्पस्य॑ विद्र॒धस्य॑ वातीका॒रस्य॑ वाल॒जेः । यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत् ॥ (२०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.13.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं तेरे लिए विसल्प (पीड़ा), विद्ध (सूजन), वातीकार एवं वालजि (संधि) नामक समस्त यक्ष्मा रोगों के विषयों को नष्ट करने वाले मंत्रों का उच्चारण कर चुका हूं. (२०)

EN English Translation

I have chanted mantras for you to destroy the subjects of all tuberculosis diseases called Visalpa (pain), Vidh (swelling), Vatikar and Valji (sandhi). (20)

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