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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 13 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 13 • मन्त्र 21

9.13.21

Mantra ID: 9.13.21

पादा॑भ्यां ते॒ जानु॑भ्यां॒ श्रोणि॑भ्यां॒ परि॒ भंस॑सः । अनू॑कादर्ष॒णीरु॒ष्णिहा॑भ्यः शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशम् ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.13.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं ने तेरी जंघाओं, पैरों, घुटनों, अनूक, उष्णिहा एवं शीश संबंधी समस्त रोगों का विनाश कर दिया है. (२१)

EN English Translation

I have destroyed all your thighs, feet, knees, anuk, heat and all diseases related to shish. (21)

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