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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 13 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 13 • मन्त्र 4

9.13.4

Mantra ID: 9.13.4

यः कृ॒णोति॑ प्र॒मोत॑म॒न्धं कृ॒णोति॒ पूरु॑षम् । सर्वं॑ शीर्ष॒र्ण्यं ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.13.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो रोग पुरुष को शक्तिहीन बनाता है और अंधा कर देता है, तेरे उन सभी शीश संबंधी रोगों को मैं तुझ से बाहर निकालता हूं. (४)

EN English Translation

The disease that makes a man powerless and blinds him, I take out all those diseases related to yours from you. (4)

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