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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 11

9.14.11

Mantra ID: 9.14.11

पञ्चा॑रे च॒क्रे प॑रि॒वर्त॑माने॒ यस्मि॑न्नात॒स्थुर्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । तस्य॒ नाक्ष॑स्तप्यते॒ भूरि॑भारः स॒नादे॒व न च्छि॑द्यते॒ सना॑भिः ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पांच अरों वाला पहिया चलता है. उस में समस्त भुवन स्थित हैं. उस के अधिक भार को सहने वाली धुरी स्वयं स्थापित नहीं होती. वह धुरी रूपी नाभि पुरानी होने पर टूटती नहीं है. (११)

EN English Translation

A wheel with five arms moves. All bhuvans are located in it. The axis that bears more load is not established on its own. That axis navel does not break when it is old. (11)

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