Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 12

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 12

9.14.12

Mantra ID: 9.14.12

पञ्च॑पादं पि॒तरं॒ द्वाद॑शाकृतिं दि॒व आ॑हुः॒ परे॒ अर्धे॑ पुरी॒षिण॑म् । अथे॒मे अ॒न्य उप॑रे विचक्ष॒णे स॒प्तच॑क्रे॒ षड॑र आहु॒रर्पि॑तम् ॥ (१२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.14.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बारह आकृतियों अर्थात्‌ बारह मासों और पांच चरणों अर्थात्‌ ऋतुओं वाले पिता अर्थात्‌ सूर्य को स्वर्ग के ऊपरी भाग में सोने वाला कहा गया है. अन्य चतुर जन इस में सात पहियों और छः अरों को स्थित बताते हैं. (१२)

EN English Translation

The father with twelve shapes i.e. twelve months and five phases i.e. seasons i.e. sun is said to be sleeping in the upper part of heaven. Other clever people say that seven wheels and six arrows are located in it. (12)

卐 HinduText AI