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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 21

9.14.21

Mantra ID: 9.14.21

यस्मि॑न्वृ॒क्षे म॒ध्वदः॑ सुप॒र्णा नि॑वि॒शन्ते॒ सुव॑ते॒ चाधि॒ विश्वे॑ । तस्य॒ यदा॒हुः पिप्प॑लं स्वा॒द्वग्रे॒ तन्नोन्न॑श॒द्यः पि॒तरं॒ न वेद॑ ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वृक्ष पर मधु का भक्षण करने वाले जो पक्षी बैठते हैं, वे विश्व का विस्तार करते हैं. जो पीपल के फलों को स्वादिष्ट बताते हैं तथा जो अपने पालक पिता को नहीं जानते, वे विनाश को प्राप्त होते हैं. (२१)

EN English Translation

The birds that eat honey on the tree, they expand the world. Those who describe peepal fruits as delicious and who do not know their foster father, they attain destruction. (21)

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