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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 20

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 20

9.14.20

Mantra ID: 9.14.20

द्वा सु॑प॒र्णा स॒युजा॒ सखा॑या समा॒नं वृ॒क्षं परि॑ षस्वजाते । तयो॑र॒न्यः पिप्प॑लं स्वा॒द्वत्त्यन॑श्नन्न॒न्यो अ॒भि चा॑कशीति ॥ (२०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सुंदर पंखों वाले दो पक्षी अर्थात्‌ आत्मा और परमात्मा एक ही संसार रूपी वृक्ष पर बैठे हैं. इन में से एक अर्थात्‌ आत्मा पीपल के स्वादिष्ट फलों को खाता है. दूसरा अर्थात्‌ परमात्मा पीपल के फलों को न खाता हुआ अपने दूसरे साथी को देखता है. (२०)

EN English Translation

Two birds with beautiful wings i.e. soul and God are sitting on the same world tree. One of these i.e. the soul eats the delicious fruits of peepal. Secondly, God does not eat the fruits of Peepal and sees his other partner. (20)

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