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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 5

9.14.5

Mantra ID: 9.14.5

इ॒ह ब्र॑वीतु॒ य ई॑म॒ङ्ग वेदा॒स्य वा॒मस्य॒ निहि॑तं प॒दं वेः । शी॒र्ष्णः क्षी॒रं दु॑ह्रते॒ गावो॑ अस्य व॒व्रिं वसा॑ना उद॒कं प॒दाऽपुः॑ ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इन सूर्य के विषय में जो जानता हो, वह बताए कि इन के चरण आकाश में कहां स्थित हैं? गाएं इन्हीं सूर्य के मंडल में दूध दुहाती हैं तथा वे गाएं इन्हीं सूर्य की किरणों के द्वारा जल पीती हैं. (५)

EN English Translation

Whoever knows about these suns, tell us where their feet are located in the sky. Cows milk in the sun's circle and those cows drink water through the rays of these suns. (5)

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