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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 6

9.14.6

Mantra ID: 9.14.6

पाकः॑ पृच्छामि॒ मन॒साऽवि॑जानन्दे॒वाना॑मे॒ना निहि॑ता प॒दानि॑ । व॒त्से ब॒ष्कयेऽधि॑ स॒प्त तन्तू॒न्वि त॑त्निरे क॒वय॒ ओत॒वा उ॑ ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.14.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सूर्य के रूप को पूर्ण रूप से न जानता हुआ मैं अपने मन से पूछता हूं कि समस्त देवों के रक्षासाधन इन सूर्य में ही निहित हैं. विद्वानों ने सूर्य देव के विस्तार के हेतु सात तंतु स्थापित कर दिए हैं. (६)

EN English Translation

Not fully aware of the form of the sun, I ask my mind that the defense of all the gods is contained in this sun. Scholars have established seven fibers for the expansion of the Sun God. (6)

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