Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 14 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 14 • मन्त्र 7

9.14.7

Mantra ID: 9.14.7

अचि॑कित्वांश्चिकि॒तुष॑श्चि॒दत्र॑ क॒वीन्पृ॑च्छामि वि॒द्वनो॒ न वि॒द्वान् । वि यस्त॒स्तम्भ॒ षडि॒मा रजां॑स्य॒जस्य॑ रू॒पे किमपि॑ स्वि॒देक॑म् ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.14.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अज्ञानी मैं विद्वानों और ज्ञानियों से पूछता हूं कि जिस ने छः रजोगुणी तत्त्वों को स्तंभित किया है, वह अजन्मा क्या एक ही है? मैं संदेह में पड़ा हूं. और संदेहरहित जनों से अपना संदेह निवारण करना चाहता हूं. (७)

EN English Translation

Ignorant I ask scholars and the wise, is the unborn the one who has pillared the six rajoguni elements the same? I am in doubt. And I want to remove my doubts from those without doubt. (7)

卐 HinduText AI