Popular:
अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 27

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 27

9.15.27

Mantra ID: 9.15.27

च॒त्वारि॒ वाक्परि॑मिता प॒दानि॒ तानि॑ विदुर्ब्राह्म॒णा ये म॑नी॒षिणः॑ । गुहा॒ त्रीणि॒ निहि॑ता॒ नेङ्ग॑यन्ति तु॒रीयं॑ वा॒चो म॑नु॒ष्या वदन्ति ॥ (२७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 9.15.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वाणी के चार निश्चित पद अर्थात्‌ चरण हैं. जो मनीषी ब्राह्मण हैं, वे उन्हें जानते हैं. इन में से तीन चरण बुद्धि रूपी गुफा में छिपे होने के कारण गति नहीं करते हैं. मनुष्य वाणी के चौथे चरण का उच्चारण करते हैं. (२७)

EN English Translation

There are four fixed positions of speech i.e. stages. Those who are mystic Brahmins know him. Three of these stages do not move due to being hidden in the cave of intelligence. Humans pronounce the fourth stage of speech. (27)

卐 HinduText AI