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9.15.28
इन्द्रं॑ मि॒त्रं वरु॑णम॒ग्निमा॑हु॒रथो॑ दि॒व्यः स सु॑प॒र्णो ग॒रुत्मा॑न् । ए॒कं सद्विप्रा॑ बहु॒धा व॑दन्त्य॒ग्निं य॒मं मा॑तरिश्वानमाहुः ॥ (२८)
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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
तत्त्वज्ञानी विद्वान् उस दिव्य गतिशील को इंद्र, मित्र, वरुण और अग्नि कहते हैं. यह दिव्य गतिशील एक है, पर विद्वान् उसे अनेक प्रकार से कहते हैं. वे उसे अग्नि, वायु एवं यम कहते हैं. (२८)
EN English Translation
Philosophical scholars call that divine dynamic Indra, Mitra, Varuna and Agni. This divine dynamic is one, but scholars call it in many ways. They call it Agni, Vayu and Yama. (28)