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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 5

9.15.5

Mantra ID: 9.15.5

हि॑ङ्कृण्व॒ती व॑सु॒पत्नी॒ वसू॑नां व॒त्समि॒च्छन्ती॒ मन॑सा॒भ्यागा॑त् । दु॒हाम॒श्विभ्यां॒ पयो॑ अ॒घ्न्येयं सा व॑र्धतां मह॒ते सौभ॑गाय ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हुंकार करती हुई, धन से पालने योग्य एवं बछड़े की इच्छा करती हुई गौ धनवानों के समीप पहुंची. हिंसा न करने योग्य यह गाय अश्चिनीकुमारों के निमित्त दूध देती हुई हमें महान सौभाग्य के लिए प्राप्त हो. (५)

EN English Translation

Shouting, raising money and wanting a calf, the cow reached near the rich. May we have great fortune by giving milk for the Ashchinikumaras, a cow that does not commit violence. (5)

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