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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 15 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 15 • मन्त्र 6

9.15.6

Mantra ID: 9.15.6

गौर॑मीमेद॒भि व॒त्सं मि॒षन्तं॑ मू॒र्धानं॒ हिङ्ङ॑कृणोन्मात॒वा उ॑ । सृक्वा॑णं घ॒र्मम॒भि वा॑वशा॒ना मिमा॑ति मा॒युं पय॑ते॒ पयो॑भिः ॥ (६)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.15.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हुंकार करती हुई गाय उस बछड़े के समीप जा कर उसे सूंघती है जो उस की ओर ताकता है. यह बताने के लिए कि यह बछड़ा मेरा ही है, यह गौ रंभाती है और अपने दूध से उसे बढ़ाती है. (६)

EN English Translation

The screaming cow goes near the calf and smells it which looks at it. To tell that this calf is mine, this cow rambhati and grows it with its milk. (6)

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