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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 2 • Mantra 20

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 2 • मन्त्र 20

9.2.20

Mantra ID: 9.2.20

याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा याव॒दापः॑ सिष्य॒दुर्याव॑द॒ग्निः । तत॒स्त्वम॑सि॒ ज्याया॑न्वि॒श्वहा॑ म॒हांस्तस्मै॑ ते काम॒ नम॒ इत्कृ॑णोमि ॥ (२०)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.2.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कामदेव! द्यावा, पृथ्वी का जितना विस्तार है, जल और अग्नि जितने विस्तृत हैं, तुम उन से कहीं अधिक विस्तृत हो, इसीलिए तुम सभी से ज्येष्ठ हो और समस्त विश्व में व्याप्त हो. मैं तुम्हारे लिए नमस्कार करता हूं. (२०)

EN English Translation

O Cupid! Dyava, the greater the expanse of the earth, the wider the water and agni, the wider you are than them, that is why you are superior to all and pervad the whole world. I salute you. (20)

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