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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 2 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 2 • मन्त्र 21

9.2.21

Mantra ID: 9.2.21

याव॑ती॒र्दिशः॑ प्र॒दिशो॒ विषू॑ची॒र्याव॑ती॒राशा॑ अभि॒चक्ष॑णा दि॒वः । तत॒स्त्वम॑सि॒ ज्याया॑न्वि॒श्वहा॑ म॒हांस्तस्मै॑ ते काम॒ नम॒ इत्कृ॑णोमि ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.2.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कामदेव! दिशाएं और प्रदिशाएं जितनी विस्तृत हैं और स्वर्ग की जितनी दिशाएं बताई गई हैं, तुम उन सभी से ज्येष्ठ हो और समस्त विश्व में व्याप्त हो. मैं तुम को नमस्कार करता हूं. (२१)

EN English Translation

O Cupid! As wide as the directions and directions are and the directions of heaven are told, you are superior to all of them and pervad the whole world. I salute you. (21)

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