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अथर्ववेद

Kanda 9 • Sukta 3 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 9 • सूक्त 3 • मन्त्र 5

9.3.5

Mantra ID: 9.3.5

सं॑दं॒शानां॑ पल॒दानां॒ परि॑ष्वञ्जल्यस्य च । इ॒दं मान॑स्य॒ पत्न्या॑ न॒द्धानि॒ वि चृ॑तामसि ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 9.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं मान की पत्नी अर्थात्‌ शाला के द्वारा बांधे गए संदेशों के, पलदों के, परिष्यंद के तथा वृणो के बंधनों को खोलता हूं. (५)

EN English Translation

I open the bonds of messages, palms, refinements and trees tied by Mann's wife, that is, the school. (5)

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