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ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 117 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 117 • ऋचा / मन्त्र 14

1.117.14

Mantra ID: 1.117.14

यु॒वं तुग्रा॑य पू॒र्व्येभि॒रेवैः॑ पुनर्म॒न्याव॑भवतं युवाना । यु॒वं भु॒ज्युमर्ण॑सो॒ निः स॑मु॒द्राद्विभि॑रूहथुरृ॒ज्रेभि॒रश्वैः॑ ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 1.117.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दुःखनिवारको! तुम जिस प्रकार प्राचीन समय में तुग्र के स्तुतिपात्र थे, उसी प्रकार बाद में भी स्तुतिपात्र रहे. तुम सेना के साथ डूबे हुए भुज्यु को अधिक जलयुक्त सागर में गमनशील नौकाओं एवं शीघ्रगति वाले अश्वं द्वारा ले आए थे. (१४)

EN English Translation

O you who are sad! Just as you were the praiseworthy of Tugrah in ancient times, so you were also praised later. You brought the submerged Bhuju with the army into the more watery sea by moving boats and fast-moving horses. (14)

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