Popular:
ऋग्वेद

Mandal 1 • Sukta 117 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 1 • सूक्त 117 • ऋचा / मन्त्र 15

1.117.15

Mantra ID: 1.117.15

अजो॑हवीदश्विना तौ॒ग्र्यो वां॒ प्रोळ्हः॑ समु॒द्रम॑व्य॒थिर्ज॑ग॒न्वान् । निष्टमू॑हथुः सु॒युजा॒ रथे॑न॒ मनो॑जवसा वृषणा स्व॒स्ति ॥ (१५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 1.117.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तुग्र द्वारा समुद्र में भेजे गए एवं जल में डूबे हुए भुज्यु ने सरलतापूर्वक सागर के पार जाकर तुम्हारी स्तुति की थी. हे मनोवेगयुक्तो एवं कामवर्षको! तुम शोभन अश्चों वाले रथ द्वारा क्षेमपूर्वक भुज्यु को लाए थे. (१५)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Bhuju, who was sent to the sea by Tugrah and immersed in water, easily went across the sea and praised you. O psychologists and work years! You brought Bhuju in a fervent manner by a chariot with shobhan asshon. (15)

卐 HinduText AI