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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 30 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 10

2.30.10

Mantra ID: 2.30.10

अ॒स्माके॑भिः॒ सत्व॑भिः शूर॒ शूरै॑र्वी॒र्या॑ कृधि॒ यानि॑ ते॒ कर्त्वा॑नि । ज्योग॑भूव॒न्ननु॑धूपितासो ह॒त्वी तेषा॒मा भ॑रा नो॒ वसू॑नि ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.30.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शूर इंद्र! हमारे शत्रुनाशक वीर पुरुषों के साथ मिलकर अपने कर्त्तव्य कार्यो को पूरा करो. तुम बहुत दिनों से घमंडी बने हुए हमारे शत्रुओं को नष्ट करके उनका धन हमें दो. (१०)

EN English Translation

O Shur Indra! Perform your duties together with our hostile brave men. You have been arrogant for many days and destroy our enemies and give us their wealth. (10)

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