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2.30.11
तं वः॒ शर्धं॒ मारु॑तं सुम्न॒युर्गि॒रोप॑ ब्रुवे॒ नम॑सा॒ दैव्यं॒ जन॑म् । यथा॑ र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नशा॑महा अपत्य॒साचं॒ श्रुत्यं॑ दि॒वेदि॑वे ॥ (११)
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ऋग्वेद मन्त्र 2.30.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे मरुद्गण! हम सुख की इच्छा से नमस्कार द्वारा तुम्हारी दिव्य, उत्पन्न तथा सम्मिलित शक्ति की प्रशंसा करते हैं. हम उससे वीर संतान पाकर प्रतिदिन उत्तम धन का उपभोग कर सकें. (११)
EN English Translation
O deserters! We admire your divine, generated and inclusive power by greeting the desire for happiness. We can get a heroic child from him and consume the best money every day. (11)