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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 31 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 7

2.31.7

Mantra ID: 2.31.7

ए॒ता वो॑ व॒श्म्युद्य॑ता यजत्रा॒ अत॑क्षन्ना॒यवो॒ नव्य॑से॒ सम् । श्र॒व॒स्यवो॒ वाजं॑ चका॒नाः सप्ति॒र्न रथ्यो॒ अह॑ धी॒तिम॑श्याः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.31.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यज्ञ के योग्य देवो! तुम स्तुतियोग्यों की अन्न और बल की इच्छा करने वाले हम स्तुति करना चाहते हैं. रथ के घोड़े के समान तुम्हारा बल हमें प्राप्त हो. (७)

EN English Translation

O gods worthy of yajna! We want to praise those who desire the food and strength of the praiseworthy. May we receive your strength like the horse of the chariot. (7)

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