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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 34 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 34 • ऋचा / मन्त्र 10

2.34.10

Mantra ID: 2.34.10

चि॒त्रं तद्वो॑ मरुतो॒ याम॑ चेकिते॒ पृश्न्या॒ यदूध॒रप्या॒पयो॑ दु॒हुः । यद्वा॑ नि॒दे नव॑मानस्य रुद्रियास्त्रि॒तं जरा॑य जुर॒ताम॑दाभ्याः ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.34.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! तुम्हारा वह विचित्र कर्म सब जानते हैं कि तुमने पृश्चिमाता के स्तनों से दूध पिया था एवं स्तोता की निंदा करने वाले को मारा था. हे अहिंसनीय रुद्रपुत्रो! तुमने त्रित ऋषि के शत्रुओं को नष्ट किया. (१०)

EN English Translation

O Maruto! All those strange deeds of yours know that you drank milk from the breasts of the earth and killed the one who condemned the psalms. O non-violent Rudraputras! You destroyed the enemies of the sage Trinity. (10)

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