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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 35 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 2

2.35.2

Mantra ID: 2.35.2

इ॒मं स्व॑स्मै हृ॒द आ सुत॑ष्टं॒ मन्त्रं॑ वोचेम कु॒विद॑स्य॒ वेद॑त् । अ॒पां नपा॑दसु॒र्य॑स्य म॒ह्ना विश्वा॑न्य॒र्यो भुव॑ना जजान ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.35.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वामी अपांनपात्‌ ,जल के नाती अर्थात्‌ अग्नि, को लक्ष्य करके हम अपने हृदय से बनाए हुए मंत्र को भली प्रकार कहेंगे. वह उसे अधिक मात्रा में जानें. उन्होंने शत्रुनाशक बल से सारे भुवनों को बनाया है. (२)

EN English Translation

By targeting Swami Apanapat, the grandson of water i.e. agni, we will say well the mantra made from our heart. He gets to know him more. He has made all the bhuvanas with the force of enemies. (2)

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