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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 38 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 38 • ऋचा / मन्त्र 3

2.38.3

Mantra ID: 2.38.3

आ॒शुभि॑श्चि॒द्यान्वि मु॑चाति नू॒नमरी॑रम॒दत॑मानं चि॒देतोः॑ । अ॒ह्यर्षू॑णां चि॒न्न्य॑याँ अवि॒ष्यामनु॑ व्र॒तं स॑वि॒तुर्मोक्यागा॑त् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.38.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जाते हुए सविता शीघ्रगामी किरणों द्वारा त्याग दिए जाते हैं. उस समय वे सविता सदा चलने वाले यात्री को रोक देते हैं एवं शत्रुओं के विरुद्ध गमन करने वाले लोगों की इच्छा का नियंत्रण करते हैं. सविता का कार्य समाप्त होने पर रात आती है. (३)

EN English Translation

On the way, Savita is abandoned by the early rays. At that time, they stop savita's ever-moving traveler and control the will of the people who travel against the enemies. The night comes when Savita's work is over. (3)

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