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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 40 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 5

2.40.5

Mantra ID: 2.40.5

विश्वा॑न्य॒न्यो भुव॑ना ज॒जान॒ विश्व॑म॒न्यो अ॑भि॒चक्षा॑ण एति । सोमा॑पूषणा॒वव॑तं॒ धियं॑ मे यु॒वाभ्यां॒ विश्वाः॒ पृत॑ना जयेम ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.40.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम और पूषा! तुम में से एक ने समस्त प्राणियों को उत्पन्न किया है, दूसरा सबका निरीक्षण करता हुआ जाता है. तुम हमारे यज्ञकर्म की रक्षा करो. तुम्हारी सहायता से हम शत्रुओं की पूरी सेना को जीत लें. (५)

EN English Translation

O Mon and Pusha! One of you has created all beings, the other observes all. You protect our yajnakarma. With your help, let us conquer the entire army of enemies. (5)

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