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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 41 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 6

2.41.6

Mantra ID: 2.41.6

ता स॒म्राजा॑ घृ॒तासु॑ती आदि॒त्या दानु॑न॒स्पती॑ । सचे॑ते॒ अन॑वह्वरम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.41.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सबके शासक, घृत रूपी अन्न का भोजन करने वाले, अदितिपुत्र व दानशील मित्र तथा वरुण यजमान की सेवा करते हैं. (६)

EN English Translation

The rulers of all, the eaters of the food in the form of disgust, the sons of Aditi and the danshil friends and Varuna serve the host. (6)

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