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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 30 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 13

4.30.13

Mantra ID: 4.30.13

उ॒त शुष्ण॑स्य धृष्णु॒या प्र मृ॑क्षो अ॒भि वेद॑नम् । पुरो॒ यद॑स्य सम्पि॒णक् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.30.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पराजयकारी इंद्र! जब तुमने शुष्ण असुर के नगरों को भली प्रकार नष्ट किया था, तभी उसका धन भी छीन लिया था. (१३)

EN English Translation

O defeating Indra! When you had thoroughly destroyed the cities of the Shushna Asura, you also took away his wealth. (13)

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