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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 31 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 8

4.31.8

Mantra ID: 4.31.8

उ॒त स्मा॑ स॒द्य इत्परि॑ शशमा॒नाय॑ सुन्व॒ते । पु॒रू चि॑न्मंहसे॒ वसु॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.31.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम स्तुतिकारी और सोमाभिषवकारी यजमान को पल भर में बहुत सा धन देने वाले हो. (८)

EN English Translation

O Indra! You are going to give a lot of money in an instant to the eulogist and somabishing host. (8)

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