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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 37 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 37 • ऋचा / मन्त्र 3

5.37.3

Mantra ID: 5.37.3

व॒धूरि॒यं पति॑मि॒च्छन्त्ये॑ति॒ य ईं॒ वहा॑ते॒ महि॑षीमिषि॒राम् । आस्य॑ श्रवस्या॒द्रथ॒ आ च॑ घोषात्पु॒रू स॒हस्रा॒ परि॑ वर्तयाते ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.37.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पत्नी यज्ञ में अपने पति के गमन की इच्छा करती हुई, उसके पीछे चलती है. इंद्र इसी प्रकार की महिषी को लाते हैं. अधिक शब्द करने वाला इंद्र का रथ हमारे समीप धन लावे एवं अगणित प्रकार की संपत्तियां चारों ओर बिखेरे. (३)

EN English Translation

The wife follows her husband, wishing to move in the yagna. Indra brings this kind of mahishi. Indra's more-worded chariot should bring us wealth and scatter a variety of properties all around us. (3)

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