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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 53 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 3

5.53.3

Mantra ID: 5.53.3

ते म॑ आहु॒र्य आ॑य॒युरुप॒ द्युभि॒र्विभि॒र्मदे॑ । नरो॒ मर्या॑ अरे॒पस॑ इ॒मान्पश्य॒न्निति॑ ष्टुहि ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.53.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तेजस्वी घोड़ों पर सवार होकर जो मरुद्गण सोमरस का आनंद प्राप्त करने आए थे, उन्होंने मुझसे कहा कि वे नेता, मानव हितकारी एवं आसक्तिरहित हैं. हे ऋषि! इस प्रकार के मरुतों को देखकर उनकी स्तुति करो. (३)

EN English Translation

The deserters who had come on stunning horses to enjoy the Somras told me that they were leaders, human-benefactors and without attachment. O sage! Seeing these kinds of maruts, praise them. (3)

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