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5.56.8
रथं॒ नु मारु॑तं व॒यं श्र॑व॒स्युमा हु॑वामहे । आ यस्मि॑न्त॒स्थौ सु॒रणा॑नि॒ बिभ्र॑ती॒ सचा॑ म॒रुत्सु॑ रोद॒सी ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.56.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हम लोग मरुतों के उस अन्नपूर्ण रथ का आह्वान करते हैं, जिस रथ में रमणीय जलों को धारण करने वाली मरुतों की माता बैठती है. (८)
EN English Translation
We call upon the full chariot of the maruts, in which sits the mother of the maruts holding the delightful waters. (8)