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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 56 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 56 • ऋचा / मन्त्र 9

5.56.9

Mantra ID: 5.56.9

तं वः॒ शर्धं॑ रथे॒शुभं॑ त्वे॒षं प॑न॒स्युमा हु॑वे । यस्मि॒न्सुजा॑ता सु॒भगा॑ मही॒यते॒ सचा॑ म॒रुत्सु॑ मीळ्हु॒षी ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.56.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! हम सुशोभित, दीप्त, स्तुतियोग्य तुम्हारे उस रथ का आह्वान करते हैं, जिस में शोभन उत्पत्ति वाली व सौभाग्य वाली मरुत्‌माता विराजती है. (९)

EN English Translation

O Maruto! We call upon the adorned, bright, praiseworthy chariot of yours, in which the desert mother of adornment and good fortune is victorious. (9)

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