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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 61 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 15

5.61.15

Mantra ID: 5.61.15

यू॒यं मर्तं॑ विपन्यवः प्रणे॒तार॑ इ॒त्था धि॒या । श्रोता॑रो॒ याम॑हूतिषु ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.61.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्तुति की अभिलाषा करने वाले मरुतो! तुम यजमानों की स्तुति सुनकर उन्हें स्वर्ग प्रदान करते हो एवं यज्ञों में उनका आह्वान सुनते हो. (१५)

EN English Translation

Maruto who craves praise! You hear the praises of the hosts and give them heaven and hear their call in the yagnas. (15)

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