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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 84 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 84 • ऋचा / मन्त्र 1

5.84.1

Mantra ID: 5.84.1

बळि॒त्था पर्व॑तानां खि॒द्रं बि॑भर्षि पृथिवि । प्र या भूमिं॑ प्रवत्वति म॒ह्ना जि॒नोषि॑ महिनि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.84.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे महती एवं शक्तिशालिनी पृथ्वी! तुम सभी प्राणियों को प्रसन्न करती हो एवं धारण करती हो. (१)

EN English Translation

O earth of greatness and power! You please and hold all beings. (1)

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