Popular:
ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 84 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 84 • ऋचा / मन्त्र 2

5.84.2

Mantra ID: 5.84.2

स्तोमा॑सस्त्वा विचारिणि॒ प्रति॑ ष्टोभन्त्य॒क्तुभिः॑ । प्र या वाजं॒ न हेष॑न्तं पे॒रुमस्य॑स्यर्जुनि ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 5.84.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे विचरण करने वाली पृथ्वी! स्तोता गतिशील स्तोत्रों से तुम्हारी प्रशंसा करते हैं. हे श्वेतरंग वाली! तुम घोड़े के समान गरजने वाले बादल को दूर फेंकती हो. (२)

EN English Translation

O wandering earth! The Psalms praise you with the dynamic hymns. Oh white- colored! You throw away a cloud that thunders like a horse. (2)

卐 HinduText AI