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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 84 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 84 • ऋचा / मन्त्र 3

5.84.3

Mantra ID: 5.84.3

दृ॒ळ्हा चि॒द्या वन॒स्पती॑न्क्ष्म॒या दर्ध॒र्ष्योज॑सा । यत्ते॑ अ॒भ्रस्य॑ वि॒द्युतो॑ दि॒वो वर्ष॑न्ति वृ॒ष्टयः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.84.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पृथ्वी! तुम्हारे बादल जब चमकते हुए जल बरसाते हैं, तब तुम अपनी शक्ति द्वारा वनस्पतियों को धारण करती हो. (३)

EN English Translation

O earth! When your clouds rain shining water, you hold the vegetation by your power. (3)

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