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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 15 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 15 • ऋचा / मन्त्र 12

6.15.12

Mantra ID: 6.15.12

त्वम॑ग्ने वनुष्य॒तो नि पा॑हि॒ त्वमु॑ नः सहसावन्नव॒द्यात् । सं त्वा॑ ध्वस्म॒न्वद॒भ्ये॑तु॒ पाथः॒ सं र॒यिः स्पृ॑ह॒याय्यः॑ सह॒स्री ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.15.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! शत्रु से हमारी रक्षा करो. हे शक्तिशाली अग्नि! पाप से हमारी रक्षा करो. हमारा दोषरहित हव्यान्न तुम्हारे समीप पहुंचे एवं तुम्हारा दिया हुआ हजारों प्रकार का धन हमें मिले. (१२)

EN English Translation

O agni! Protect us from the enemy. O mighty agni! Protect us from sin. Our faultless desire came to you and we received thousands of kinds of money you had given us. (12)

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